आग से खेलने वाली भारत की पहली महिला!

कहते हैं कि आग से खेलना कोई बच्चों का काम थोड़े ही है. अच्छे-अच्छे लोग आग से डरकर कोसों दूर भाग जाते हैं. लेकिन इसी आग से लोगों को हर्षिनी कान्हेकर बचाती हैं. जिन्हें लगता है कि फायर फाइटर का काम केवल और केवल पुरुषों का काम है. उनके लिए वह जवाब हैं.
हर्षिनी कान्हेकर जिस तरह से इस काम को संभालती हैं. वह उनके बुलंद हौसले को दर्शाता है. हर्षिनी कान्हेकर का ज्यादातर समय ड्रिल एक्टिविटिज और बचाव कार्य में जाता है. हर्शिनी का सपना था कि वो सेना में शामिल हों, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था.
26 साल की उम्र में उन्होंने फायर और आपातकालीन सेवाओं के एक कोर्स में प्रवेश लिया. वह पहली भारतीय महिला थीं जिन्होंने साल 2002 में इस कोर्स में दाखिला लिया. और बन गईं भारत की पहली महिला फायर फाइटर. इसके साथ-साथ उन्हें बाइक चलाना भी पसंद है. जिसमे से शान की सवारी कहै जाने वाली बुलेट उनकी पसंदीदा बाइकों में से एक है.

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