एक महिला जिसने हाथ से नहीं, पैरों से अपनी किस्मत लिखी है!

ऋषिकेश में एक गांव है- गौहरीमाफी. इस गांव में असल में नारी सशक्तीकरण की मिसाल देखने को मिल जाएगी. इस गांव में की एक महिला का नाम है पुष्पा रावत. जोकि दोनों हाथों से लाचार हैं, लेकिन इसके बावजूद अपने पैरों से अपनी तकदीर लिख डाली. उन्होंने वहीं एक संत से प्राथमिक शिक्षा शुरू की. उन्होंने ने ही पैर का अंगूठा पकड़कर हिंदी वर्णमाला लिखना सिखाया. और धीरे-धीरे पुष्पा पैर से लिखना सीख गईं.
कुछ दिनों बाद उनका परिवार गौहरीमाफी में आ बसा. वो जूनियर हाईस्कूल श्यामपुर गई, तो प्रिंसिपल ने एडमिशन देने से मना कर दिया. लेकिन, पैरों से लिखकर दिखाने पर हिंदी के टीचर ने पुष्पा को एडमिशन दिला दिया.
उनके संघर्ष को पहचान 2003 में मिली. जब उन्हें ओएनजीसी देहरादून के राजभाषा विभाग में सेवा का मौका मिला. इस समय वो वो राजभाषा विभाग में काम कर रही हैं, और अपने सभी काम आम रूप से कर रही हैं.

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